कुकर में फस गया था बच्चे का सर,डॉक्टरों ने ऐसे बचाई जान

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बच्चे अक्सर शरारते करने में माहिर होते है उन्हें सही गलत की कोई समझ नही होती उन्हें तो बस सब कुछ भूल कर अपना खेल खेलना होता है लेकिन कभी कभी बच्चो का खले भी भारी पड़ जाता है यदि उनपर थोड़ी सी देर के लिए भी ध्यान नही दिया जाता ! ऐसा ही एक मामला हमारे सामने आया है जहाँ एक डेढ़ साल के बच्चे के सिर में कुकर फंस जाता है जिसे देख कर डाक्टर रो पड़ते है चलिए जानतेहै पूरा मामला क्या था !

आगरा शहर में कल एक ऐसा मामला सामने आया की डॉक्टर भी एक बार हैरान हो गये उन्हें लगा की अब इस बच्चे को बचाएं तो कैसे बचाएं। उनके सामने ऐसा पहला मामला था और इस तरह के मामले में बच्चे की जान जा सकती थी। चूँकि बच्चा सांस नहीं ले पा रहा था और डॉक्टर उन्हें किसी भी तरह से सांस लेने में मदद नहीं कर पा रहे थे। आइये जानते है क्या है पूरा मामला और कैसे डॉक्टरों ने इनकी मदद करी –

होस्पिटल में देखकर सब दंग रह गये

आगरा के मंडी रेलवे स्टेशन के पास SM Chartable Hospital में कल जब माँ-बाप रोते हुए एक बच्चे को लेकर आये। इस बच्चे के सर में कुकर फंस गया था और बच्चा सांस भी नहीं ले पा रहा था। बच्चे की धड़कने कम होती जा रही थी। बच्चा धीरे-धीरे कमजोर होता जा रहा था जिससे बच्चे के माता-पिता काफी डर गये थे। हॉस्पिटल में आते ही वह जोर-जोर से गुहार करने लगे की हमारे बच्चे को बचा लीजिये।

डॉक्टर ने पूरा किया अपना कर्तव्य

हॉस्पिटल में डॉक्टर फरहात की टीम ने बच्चे के सर से कुकर निकालने के लिए ग्लाइडर मशीन का उपयोग किया और काफी सावधानी से कुकर को सर से अलग किया। बच्चा काफी कमजोर और निढाल हो चूका था। बच्चे का प्राथमिक उपचार शुरू किया और जब तक बच्चे को ठीक से होश नहीं आया तब तक डॉक्टर की टीम बच्चे की देख-रेख करती थी।

डॉक्टर फरहात कहते है की बच्चे की हालत देखकर एक बार तो उन्हें भी डर लगा चूँकि ऐसे मामले बहुत कम आते है। लेकिन मेरी टीम ने अच्छे से काम किया और बच्चे को बचा लिया। बच्चे के माता-पिता के पास हमारी फ़ीस देने के पैसे नहीं थे तो हमने बिलकुल फ्री में उनकी मदद करी और सच कहूँ तो हमारा कर्तव्य लोगों की जान बचाना है पैसा कमाना नहीं।

कैसे फंसा कुकर सर में

बच्चे के माता-पिता को यह नहीं पता है की बच्चे ने कुकर को कैसे सर में फंसाया, उनके अनुसार वह घर में खेल रहा था और अचानक से उनके पास आया तो बहुत गंभीर हालत में था। हमने कोशिश करी घर में ही कुकर निकालने की लेकिन हम असफल रहे और बच्चे की हालत खराब हो रही थी।

हमसे यह देखा नहीं गया और हमने डॉक्टर के पास लेजाना सही समझा। उन्होंने डॉक्टर को धन्यवाद करते हुए कहा की आज ईश्वर धरती पर है इसका पता चल गया है।

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