देवी समझकर लोग छूते थे इस अभिनेत्री के पैर, फिल्म जगत में मां के किरदार को कर दिया अमर!

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दोस्तों आज भी जब मां का किरदार निभाने की बात आती है तो सबकी आंख के सामने एक्ट्रेस निरुपा रॉय का चेहरा घूमने लगता है। उन्हें ऐसे ही बॉलीवुड की मां नहीं कहा जाता था। उन्होंने अपने बेहतरीन अभिनय से मां के चरित्र को नया आयाम दिया। उनके द्वारा निभाए गए मां के किरदार लोगों के दिलों में इस कदर बस गए कि उन्हें ‘बॉलीवुड की मां’ का खिताब दे दिया गया।

निरूपा रॉय का जन्म 4 जनवरी 1931 को गुजरात के वलसाड में हुआ था। 15 साल की उम्र में उनकी शादी कमल रॉय से हो गई थी। शादी के बाद निरूपा रॉय मुंबई पहुंचीं। उनके दो बेटे हुए- योगेश और किरण। उनका असली नाम कोकिला किशोरचंद्र बुलसारा था। फिल्म इंडस्ट्री में आने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर निरूपा रॉय कर लिया।

निरूपा रॉय ने साल 1946 में अपना गुजराती फिल्मों से अपने करियर की शुरुआत की थी। उनकी उनकी पहली फिल्म ‘रणकदेवी’ थी। अपने पचास साल के करियर में उन्होंने करीब पांच सौ फिल्मों में काम किया। निरूपा रॉय ने अपने करियर में जितनी भी फिल्में कीं उनमें से ज्यादातर में वो मां के किरदार में ही नजर आईं, लेकिन शायद लोग नहीं जानते कि निरूपा रॉय ने एक-दो नहीं बल्कि 16 फिल्मों में देवी का किरदार निभाया था।

देवी के निभाए गए किरदारों में निरूपा रॉय ने ऐसी छाप छोड़ी कि लोग उन्हें सचमुच में देवी मानने लगे थे। कहा तो ये भी जाता है कि लोग उनके घर जाकर उनके पैर छूते थे और भजन गाते थे। जहां 50 के दशक में निरूपा रॉय को ‘देवी’ माना जाता था तो वहीं 70-80 के दशक में निरूपा रॉय ने इतनी फिल्मों में मां का किरदार निभाया कि उन्हें असल जिंदगी में ‘मां’ कहा जाने लगा।

निरूपा रॉय ने अमिताभ बच्चन से लेकर शशि कपूर, जितेंद्र जैसे अभिनेताओं की मां का रोल निभाया। साल 1999 में आई फिल्म ‘लाल बादशाह’ में अमिताभ बच्चन और निरूपा रॉय दोनों आखिरी बार मां-बेटे के रोल में दिखे। 13 अक्तूबर साल 2004 में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

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